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happiness

Happiness

क्या आपकी खुशी कहीं खो गयी है ? क्या आप खुश रहना चाहते हैं ? आप कहोगे , कौन खुश नहीं रहना चाहता ? हम आपको बताएं ? सबसे आसान कोई काम अगर है , तो वो है खुश रहना ।

खुशी बनती कहाँ है ??
आपकी खुशी की अपनी एक तस्वीर होती हैं और वो तस्वीर आप स्वयं बनाते हो । तस्वीर बनती है आपके कम्फर्ट ज़ोन में और कम्फर्ट ज़ोन बनता है आपकी धारणाओं से ।

खुशी के जैसे विचार , प्रतिदिन आप बार बार धारण करते हो , वैसी आपकी धारनाएं बनती जाती हैं । धारनाएं मिलकर आपका खुशी का कम्फर्ट ज़ोन बना देती हैं । और फिर यही कम्फर्ट ज़ोन निर्णय लेने लगता है कि आप कौन सी बात पर खुश हो सकते हो , कौन सी बात पर नहीं ।

अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोग छोटी छोटी बातों पर , छोटे छोटे दुखों और नुकसान पर बड़ी सख्त प्रतिक्रिया करते हैं और नाराज़ हो जाते है । अपनी खुशी को निछावर कर देते हैं । और दूसरी तरफ कुछ ऐसे होते हैं जो बहुत सिरियस बातों को भी मज़ाक में उड़ा देते है , बड़े बड़े दुखों और नुक़सानों को भी बड़ी संजीदगी और सब्र से स्वीकार कर लेते है । ऐसा क्यों होता है ?

यह हर किसी के अपने अपने कम्फर्ट ज़ोन के स्तर पर निर्भर करता है ।

जब जब आपके सामने ऐसी परिस्थिति आती है जो कि आपकी बनी धारणाओं के विपरीत होती है तब आपकी इच्छाओं और बने हुए कम्फर्ट ज़ोन के बीच युद्ध छिड़ जाता है और आप अपनी स्थिरता को कमजोर करने लगते हो । आपकी खुशी कमजोर होने लगती है ।

इस पूरी क्रिया प्रणाली में ध्यान से देखो आप और आपके बीच यह तीसरा कौन है जो आपकी खुशी को लूट कर ले गया ?

दोस्त ! वो और कोई नहीं । वो है आपका ही बनाया हुआ कम्फर्ट ज़ोन और आपकी ही बनाई हुई धारनाएं ।

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