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Abundance

क्या आप स्मृद्ध नहीं है ? आपकी अमीरी कहीं खो गयी है ? क्या आप अमीर होना चाहते हैं ? धन सम्पदा कमाना चाहते है ? आपको एक खुशी की बात बताऊँ ? स्मृद्ध रहना , धन सम्पदा कमाना आसान है ।

आपके मन में प्रश्न गूंज रहे होंगे कि धन सम्पदा , बहुतायत और स्मृद्ध होना क्या मेरे अपने हाथ मे है? क्या धन सम्पदा अर्जित करना बाहरी परिस्थितियों के हाथ मे नहीं है ? मेरी लाभ हानि , क्या किसी समाज , किसी देश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं है ?

ज़िंदगी ! जब तुम धन सम्पदा , बहुतायत और स्मृद्धि के बारे मे सुनते हो , तो अचानक तुम मस्तिष्क में क्या सोचते हो ? यही ना कि अधिक धन सम्पदा पाना , स्मृद्ध होना , आराम दायक जीवन जीना आसान नहीं है ?

परंतु यह सत्य नहीं है । जब कभी भी आप किसी भी तरह की बहुतायत पाने की इच्छा करते हो तो यह याद रखिए कि आप जिस ब्रह्मांड मे रहते हो वो असीम ख़ज़ाने से भरपूर है ।

रोमांचक हो गए हो ना ? यह सत्य है , इस ब्रह्मांड मे बहुतायत है और यह असीमता किसी भी समय या स्थान में बँधी हुई नहीं है।

प्रश्न उठता है कि इस असीम , लगातार बहते हुए अथाह समुद्र से स्मृद्धि पायी कैसे जाए ? अपनी इच्छा और ब्रह्मांड के असीम लेकिन छुपे हुए खज़ानो के बीच
बैलेन्स कैसे बनाया जाए ?

चलिये बताते हैं । आपको सबसे पहले क्या करना होगा । सबसे पहले आपको आज क्या हो और कल क्या होना चाहते हो , इसके बीच के अंतर्विरोधों को ख़त्म करना होगा ।

यह कैसे किया जा सकता है ? इन खज़ानों को कौन सी चाबी लगती है ? हम आगे इन चाबियों के बारे में बताते हैं ।

धन सम्पदा पाने के लिए आपका स्मृद्ध होना अति आवश्यक है । आपकी स्मृद्धता ही आपकी अमीरी है । आपको सबसे पहला एक काम यह करना है कि आज से अपने आप को स्मृद्ध महसूस करना शुरू कर देना है ।

आपको आगे बताएं कि जिस भी वस्तु के बारे मे आप लगातार सोचते हैं और महसूस करते हैं , आप उसे आकर्षित करते हैं । अगर तुम अपने जीवन मे अधिक बहुतायत और समृद्धि को आकर्षित करना चाहते हो , तो पहले आपको स्मृद्ध विचारों और अपने ह्रदय के भावों के बीच संपर्क बनाना होगा । क्योंकि देने वाली शक्ति आपको वो नहीं देती जो आप चाहते हो , आपको वो देती है जो आप हो !

आप अपने आंतरिक मन मे कल्पनाओं का चित्रण कर कुछ भी निर्मित कर सकते हो । आपको अपने अंदर के संसार मे विश्वास के साथ इस नए काल्पनिक अनुभव को जगह देनी होगी । फिर आप देखोगे कि अभ्यास के साथ यह दिखना शुरू हो जाएगा , मुमकिन हो जाएगा । आसान हो जाएगा । आपके कम्फर्ट ज़ोन मे आपका यह चित्रण अपना स्थान बना कर अनुभव का रूप ले लेगा । तुम्हें विश्वास होने लगेगा कि यह संभव है ।

मनुष्य अपने विचारों से अपने लक्ष्यों के अनुसार तत्वों की भौतिक शक्ल बदल सकता है । धन सम्पदा भी तत्व हैं , ऊर्जा हैं । संसार की कोई भी वस्तु को पाने के लिए धन को साधन किसने बनाया है ? उसे ऊर्जा किसने दी ? धन को शक्ल किसने दी ? आपने ही ना । धन भी तो किसी तत्व ऊर्जा से ही बनी हुई वस्तु है ना ।

इन्ही तत्वों की ऊर्जा तुम्हारे विचारों से उठते अहसासों और भावों के आधार पर भिन्न भिन्न शक्ल धारण करती रहती हैं । उपयोगिता और आवश्यकता के आधार पर तुम्हारी बुद्धि इन पर आर्थिक कीमत का लेबल लगा देती है ।

इन्हे पाने के लिए आप धन कमाने में लगे रहते हो । खूब मेहनत करते हो , संघर्ष करते हो । आपकी बुद्धि ने आपके अंदर यह धारणा बना दी है कि इन भौतिक वस्तुओं व संपदाओं को पाने के लिए पहले धन का होना आवश्यक है ।

ठीक है , धन आवश्यक है , लेकिन पहले नहीं । यदि आप संपदाओं को पाना चाहते हो तो आपको उन तत्वों को अपने अंदर के संसार मे शक्ल देनी होगी । अपने अवचेतन मन मे उनको चित्रित करना होगा । जब वो शक्लें तुम्हारे अहसासों और भावों मे स्थान बना लेंगी तब तुम्हारे सामने उन शक्लों को प्राप्त करने के कई स्रोत्र जिसमे धन कमाना भी शामिल है , अवसर बन कर आने शुरू हो जाएंगे । परिणाम स्वरूप तुम बुद्धि का इस्तेमाल करके अपने बाहरी जगत मे चाहतों के अनुसार संपदाओं को भौतिक शक्ल देने लग जाओगे ।

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