Call Now: 8287999555 (For Online Counselling) / 9760545654
relation

Relation

हमें मालूम है कि आप क्या सोच रहे हैं ?।

क्या रिश्तों में भी खुशी और सौहार्द उत्पन्न किया जा सकता हैं ? क्या रिश्तों को स्वस्थ रखना भी मेरे अपने हाथ मे है ? रिश्ते क्या महत्व रखते हैं मेरे जीवन में ? यही ना ?

जी हाँ ! अपने जीवन में सभी रिश्तों का अपनी इच्छा अनुसार निर्माण करना मुमकिन है । अपने रिश्तों को मधुर रखना आपके अपने हाथों में है । रिश्तों का बहुत महत्व है आपके जीवन में ।

आए दिन देखने को मिलता है कि इंसान आपसी रिश्तों में दुख व सुख , नाराजगी व खुशी का निर्माण करता रहता है । आशा के अनुरूप एक रिश्ता व्यवहार नहीं करता तो दूसरा रिश्ता कई प्रकार के दुखों , नाराजगियों , चिंताओ , शारीरिक बीमारियों को उत्पन कर लेता है ।

एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से आशा रखता है और समझता है कि उसकी खुशी , उसकी सफलता , उसकी ज़िंदगी दूसरे रिश्ते के हाथ में है ।

मनुष्य को रिश्तों से कुछ प्राप्त होने की अपेक्षा होती है। वह अपने रिश्तों को इसी नज़र से देखता है और जब वो नहीं दिखता जो वो देखना चाहता है , तो रिश्तों मे खटास का निर्माण कर लेता है । इसलिए , रिश्ते उसे दुखों की तरफ ले जाते हैं । खटास पैदा कर देते हैं ।

वास्तविकता यह है कि रिश्तों को निभाते हुए , अपनी खुशी की अपेक्षा करना व्यापार है । क्योंकि ! ऐसे मे दोनों रिश्तों में अपनी बात कहने का बराबर का हक हो जाता है । ऐसी अवस्था में नाराजगी करने का हक नहीं रह जाता । और अगर प्यार है , ज़िम्मेदारी है , अपनी खुशी के लिए किया है तो फिर नाराजगी करने कि ज़रूरत ही नहीं जाती

आप अपनी खुशी दूसरे रिश्तों में ढूंढते रहते हो और जब अपेक्षा अनुसार उसका कोई हल नहीं नज़र आता तो उन रिश्तों को , किस्मत को और कर्मो को दोष देने लगते हो !

होता क्या है कि मनुष्य हमेशा अच्छे , बने बनाए रिश्तों की तलाश मे सारी उम्र अपने पुराने रिश्ते तोड़ते रहता है या नए रिश्ते बनाता रहता है । रिश्तों के प्रबंधन और नव निर्माण की ज़िम्मेदारी से भागता रहता है ।

ऐसा इसलिए है क्योंकि मनुष्य ने अपने रिश्तों के कम्फर्ट ज़ोन में धारणा बना ली होती है कि कोई भी मनुष्य इस धरती पर बना बनाया आता है , कभी बदलता नहीं है । मनुष्य को बदलना असंभव है ! इसलिए बने बनाए , जैसे रिश्ते उसे चाहिए वैसे रिश्तों को ढूँढने मे लगा रहता है ।

हम आपको बताते हैं कि रिश्तों का निर्माण भी किया जा सकता है वो भी अपनी इच्छा अनुसार । मधुर रिश्तों को वही पा सकता है जो उन रिश्तों का निर्माण करता है ! ना कि दुनियाँ के बाज़ार मे अच्छी वस्तुओं की तरह अच्छे रिश्तों की तलाश करता रहता है ।

Copyright © 2009-2015 Happy Universe All Rights Reserved
Powered By: Sepal Technologies